कोई तीन साल पहले तत्कालीन इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा की एक टिप्पणी का जबर्दस्त विरोध करते हुए समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने संसद के दोनों सदनों में हंगामा किया था। लोकसभा की कार्यवाही दो बार बाधित हुई और बाद में पूरे दिन के लिए स्थगित हो गई। राज्यसभा की कार्यवाही एक बार रुकी और बाद में दिनभर के लिए स्थगित हो गई। बात 18 मार्च 2013 की है। और जिस टिप्पणी को लेकर यह सब हुआ, वह बेनी बाबू के मुलायम सिंह यादव पर लगाए गए अत्यंत गंभीर आरोप थे। बेनी बाबू ने एक दिन पहले 17 मार्च को गोंडा की एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा था: ‘समाजवादी पार्टी नहीं, सिर्फ मुलायम सिंह यादव खराब हैं। उनका आपराधिक जीवन रहा है और आतंकवादियों से भी उनका रिश्ता है। बहुत जल्द मुलायम तिहाड़ जेल जाने को तैयार रहें। मुलायम जहर के घूट पी रहे हैं और कांग्रेस को समर्थन दे रहे हैं और कमीशन भी खा रहे हैं। मुलायम ने हमेशा अपने विरोधियों को दुश्मन की तरह लिया है। मुलायम लुटेरे के साथ गुंडे भी हैं’।

बेनी प्रसाद वर्मा ने लोकसभा में अपनी टिप्पणी को उचित ठहराया लेकिन सरकार की जब किरकिरी हुई तो उसकी तरफ से संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ ने इस टिप्पणी पर खेद प्रकट किया और उसकी निंदा की। लोकसभा में शून्य प्रहर में मुलायम सिंह ने कहा, ‘मुझे आतंकवादी कहा गया है। जब तक मंत्री को बर्खास्त नहीं किया जाता हम शांत नहीं रहेंगे। अगर यह साबित हो जाय कि मैं आतंकवादी हूं तो मुझे जेल भेज दिया जाय वरना मंत्री को बर्खास्त किया जाय’। उन्होंने कहा कि श्री वर्मा ने सभी मुसलमानों को आतंकवादी कहा है, वे माफी मांगें। कमलनाथ ने इस पर खेद प्रकट करते हुए कहा कि श्री यादव का कद किसी साधारण सदस्य जैसा नहीं है। वे अपनी पार्टी के नेता हैं। वे उनकी भावनाओं की कद्र करते हैं और हम सभी इसकी निंदा करते हैं। लेकिन बेनी बाबू अपने बयान पर कायम रहे और उन्होंने कहा कि माफी मांगने का कोई प्रश्न नहीं है। मैंने आतंकवाद को किसी धर्म से नहीं जोड़ा। उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि बाबरी मस्जिद को गिराया जाना और गोधरा काण्ड के बाद हुए दंगे आतंकवादी घटनाएं थीं। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह कल्याण सिंह की तरह उन लोगों के साथ थे जिन्होंने बाबरी मस्जिद गिराई। उनकी पार्टी ने गुजरात में भाजपा को जिताने में मदद की। उन्हें मंत्री पद से हटाए जाने की मुलायम सिंह की मांग के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा- क्या उन्होंने मुझे मंत्री बनाया है?
अब बेनी बाबू कांग्रेस छोड़कर फिर से समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए हैं और सपा ने उन्हें राज्यसभा चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार भी घोषित कर दिया है। वाह क्या बात है!

अब सुनिए अमर सिंह के बोल
उन्होंने 21 मार्च 2010 को कहा था कि मुलायम सिंह या तो लोहियावादी नहीं हैं या फिर अपने स्वार्थी मुलायमवाद का सफेद झूठ लोहिया जी पर मढ़ना चाहते हैं। मेरी गलती थी कि मैंने 14 साल से हो रही इस धांधली को नहीं देखा। आगरा में 5 दिसम्बर 2010 को अमर सिंह ने कहा- मैं बोल दूंगा तो मुलायम सिंह मुश्किल में पड़ जाएंगे, मेरा मुंह खुला तो सपा के कई नेता जेल पहुंच जाएंगे और मुलायम सिंह को जेल की चक्की पीसनी पड़ेगी। 2 फरवरी 2010 को सपा से निकाले जाने के बाद सपा अध्यक्ष को झूठा कहने के साथ ही ऐलान कर दिया कि वे जहर खा लेंगे लेकिन मुलायम सिंह की शकल दोबारा नहीं देखेंगे। अमर सिंह अभी समावादी पार्टी में वापस तो नहीं आए हैं लेकिन सपा ने उन्हें राज्यसभा चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। वाह! क्या राजनीति इसी को कहते हैं?